धैर्य से बना लो सारे काम- Patience is the king-Motivation
धैर्य से बना लो सारे काम- Patience is the king-Motivation
वर्तमान समय इंटरनेट का समय है जहां दूध पीते 3 साल के बच्चे से लेकर 80साल तक के नकली दांतों लगाए हुए वृद्धजन भी सोशल मीडिया पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
तीन घंटे की एक फिल्म लगातार बैठकर देखने पर हमारा धैर्य जवाब देने लगता है
लोगों के पास समय तो है किन्तु धैर्य नहीं बचा है।
हर चीज़ में बस फास्ट मज़ा चाहिए—
हर 20–30 सेकंड में हँसी आए, कुछ नया दिखे, दिमाग़ तुरंत खुश हो जाए, और कुछ रोमांचित कर देना वाला होना चाहिए।
इसी चाहत में इंसान 3 घंटे रील्स तो बड़ी आसानी से देख लेता है, पर उतनी देर बैठकर फ़िल्म नहीं देख पाता।
दिमाग़ भी इस का आदी हो गया है—
यूट्यूब वीडियो 1.5x पर देखनी हैं,
पॉलिटी एक ही मैराथन में आज ही ख़त्म करनी है,
एक महीने में पूरा प्रीलिम्स का सिलेबस निपटा देना है,
और 4 दिन में Ethics gs4 पढ़कर किनारे कर देनी है।
अभ्यर्थियों में धैर्य चुपचाप कम होता जा रहा है।
धीमे, भावपूर्ण गीत—जो कभी मुकेश, और मोहम्मद रफी ने गाए—अब “बोरिंग” लगते हैं।
अब रैपिंग चाहिए… तेज़ बीट चाहिए… तुरंत मज़ा चाहिए।
हम सब भाग रहे हैं—
ना पता कहाँ,
ना पता क्यों,
बस इतना पता है कि जो भी मिले, तुरंत मिले… अभी मिले। हम धैर्य से किसी भी चीज का इंतजार करना नहीं जानते।
आने वाली पीढ़ियों का धीरज घटता जा रहा है—
और यह बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है।
व्यवहार में भी उतावलापन भर गया है—, जरा जरा सी बात पर आग बबूले होने में देर नहीं लगती।
“आज ही किसी को पूरी तरह जान लूँ”,
“इस साल ही सेलेक्शन चाहिए”…
ऐसी अधीर सोच बढ़ रही है।
पर इस तेज़ दौड़ में कभी ठहरो।
खुद को थोड़ा समय दो।
क्योंकि सच यह है—
परिपक्वता धीरे-धीरे ही आती है।
धैर्य तो रखना ही पड़ेगा।
रातों-रात सफलता की चाहत सिर्फ़ तनाव देगी।
“उस exam में अभी बहुत समय है—
तब तक किस परीक्षा की तैयारी करूँ?”
—यह सवाल ही दिखाता है कि प्रतियोगी छात्रों अधैर्य कितना बढ़ गया है।
शांत रहो।
इधर-उधर मत दौड़ो।
उस एक महत्वपूर्ण दिन के लिए
खुद को धीरे-धीरे मजबूत और परिपक्व बनाओ।
लक्ष्य एक रखो। उसी को पाने को तत्पर रहो,
रातों-रात सब कुछ कर देने के सपने मत देखो।
अच्छी चीज़ें समय लेती हैं।
एक दिन तुम्हारी भी बारी आएगी और संघर्षों का अंत भी होगा।
शुभाशीष।
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