स्वतंत्रता पूर्व प्रमुख किसान आंदोलन (Major Pre-Independence Agrarian Revolts)

स्वतंत्रता पूर्व प्रमुख किसान आंदोलन

(Major Pre-Independence Agrarian Revolts)

संथाल विद्रोह (1855-56)- संथाल विद्रोह पर संथालों को वैश्विक गौरव (Global Pride) प्राप्त है जिसमें 1,000 से अधिक संथाल और सिद्धो व कान्हो मुर्मू (Sidho and Kanho Murmu) के नेताओं ने वर्चस्व को लेकर विशाल ईस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेज़ों) के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

नील विद्रोह (1859-60)- यह ब्रिटिश बागान मालिकों के खिलाफ किसानों द्वारा किया गया विद्रोह था, क्योंकि उन्हें उन शर्तों के तहत नील उगाने हेतु मजबूर किया गया था जो कि किसानों के लिये प्रतिकूल थे।

पबना विद्रोह (1872-1875) - यह ज़मींदारों के उत्पीड़न के खिलाफ एक प्रतिरोध आंदोलन था। इसकी उत्पत्ति युसुफशाही परगना में हुई थी, जो अब बृहत्तर पबना, बांग्लादेश में सिराजगंज ज़िला है।

दक्कन विद्रोह (1875) - दक्कन के किसान विद्रोह मुख्य रूप से मारवाड़ी और गुजराती साहूकारों की ज्यादतियों के खिलाफ थे। रैयतवाड़ी व्यवस्था के तहत रैयतों को भारी कराधान का सामना करना पड़ा। वर्ष 1867 में भू-राजस्व में भी 50% की वृद्धि की गई।

पगड़ी संभाल आंदोलन (1907)- यह एक सफल कृषि आंदोलन था जिसने ब्रिटिश सरकार को कृषि से संबंधित तीन कानूनों को निरस्त करने के लिये मज़बूर किया। इस आंदोलन के पीछे भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह थे।

अवध में किसान आंदोलन (1918-1922)- इसका नेतृत्व एक संन्यासी बाबा रामचंद्र ने किया था, जो पहले एक गिरमिटिया मज़दूर के रूप में फिजी गए थे। उन्होंने अवध में तालुकदारों और ज़मींदारों के खिलाफ एक किसान आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने लगान कम करने, बेगार को समाप्त करने और ज़मींदारों के बहिष्कार की मांग की।

चंपारण आंदोलन (1917-18)- बिहार के चंपारण ज़िले के नील के बागानों में यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों का अत्यधिक उत्पीड़न किया गया और उन्हें अपनी ज़मीन के कम-से-कम 3/20वें हिस्से पर नील उगाने तथा बागान मालिकों द्वारा निर्धारित कीमतों पर बेचने के लिये मज़बूर किया गया था। वर्ष 1917 में महात्मा गांधी चंपारण पहुँचे और चंपारण छोड़ने हेतु ज़िला अधिकारी द्वारा दिये गए आदेशों की अवहेलना की।

खेड़ा में किसान आंदोलन (1918) - यह मुख्य रूप से सरकार के खिलाफ निर्देशित था। 1918 में गुजरात के खेड़ा ज़िले में फसलें विफल हो गईं, लेकिन सरकार ने भू-राजस्व में छूट देने से इनकार कर दिया और राजस्व के पूर्ण संग्रह पर ज़ोर दिया। गांधीजी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ किसानों का समर्थन किया और उन्हें सलाह दी कि जब तक उनकी छूट की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे राजस्व का भुगतान रोक दें।

मोपला विद्रोह (1921) - मोपला मुस्लिम काश्तकार थे जो मालाबार क्षेत्र में निवास करते थे जहाँ अधिकांश ज़मींदार हिंदू थे। उनकी शिकायतें कार्यकाल की सुरक्षा की कमी, उच्च किराया, नवीनीकरण शुल्क और अन्य दमनकारी वसूली पर केंद्रित थीं। बाद में मोपला आंदोलन का विलय खिलाफत आंदोलन में हो गया।

बारदोली सत्याग्रह (1928) - यह स्वतंत्रता संग्राम में बारदोली के किसानों के लिये अन्यायपूर्ण करों के खिलाफ सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में एक आंदोलन था।

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